सुस्वागतम्
नारायण विजय पंचांग
काल-गणना की प्राचीन परम्परा — शास्त्रसम्मत, स्व-संगणित हिन्दू पञ्चाङ्ग,
पंचांग से कुंडली, मुहूर्त एवं राशिफल तक — एक ही स्थान पर।
पंचांग से कुंडली, मुहूर्त एवं राशिफल तक — एक ही स्थान पर।
आज का संक्षिप्त पंचांगउज्जैन (मध्यप्रदेश)
सेवाएँ
महाकाल उज्जैन — काल-गणना की अधिष्ठात्री नगरी

आकाशे तारकं लिङ्गं पाताले हाटकेश्वरम्।
मृत्युलोके महाकालं त्रयं लिङ्गं नमाम्यहम्॥
मृत्युलोके महाकालं त्रयं लिङ्गं नमाम्यहम्॥
उज्जैन (प्राचीन अवन्तिका) भारतीय खगोल-शास्त्र का परम्परागत संदर्भ-बिन्दु रही है। आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर ने उज्जैन के देशान्तर को भारतीय काल-गणना का प्रधान मध्याह्न माना — इसीलिए परम्परागत पंचांग में सूर्योदय, तिथि, नक्षत्र आदि की गणना उज्जैन के सापेक्ष की जाती है। महाकालेश्वर — द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी — यहीं विराजमान हैं; “महाकाल” अर्थात् काल के अधिपति, अत: यह नगरी समय-गणना एवं ज्योतिष की अधिष्ठात्री मानी जाती है।
देशान्तर75° 46′ 30″ पू.
अक्षांश23° 10′ 36″ उ.
ज्योतिर्लिंगद्वादश में प्रथम
काल-गणनाउज्जैन मध्याह्न
दर्शन — मन्दिर की झाँकियाँ





इस पंचांग के बारे में
नारायण विजय पंचांग परम्परागत गणना-पद्धतियों — ग्रहलाघव, सूर्य सिद्धान्त एवं दृक् गणित — पर आधारित है। सभी गणनाएँ पूर्णत: स्व-संगणित हैं; किसी बाह्य सेवा अथवा स्क्रेपिंग का उपयोग नहीं किया गया। हमारा ध्येय है शुद्ध शास्त्रीय गणना, सरल एवं सुलभ रूप में।